Skip to content
Daily Mandi Bhav Daily Mandi Bhav

किसानों के लिए ताजा खबरे व मंडी भाव | Daily Mandi Bhav |

Daily Mandi Bhav Daily Mandi Bhav

किसानों के लिए ताजा खबरे व मंडी भाव | Daily Mandi Bhav |

  • Home
  • Cart
  • Checkout
  • My account
  • Shop
  • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
  • नियम एवं शर्तें (Terms & Conditions)
  • सब्सक्राइब करें
  • Home
  • Cart
  • Checkout
  • My account
  • Shop
  • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
  • नियम एवं शर्तें (Terms & Conditions)
  • सब्सक्राइब करें
Close

Search

  • Youtube
  • Facebook
Subscribe
Daily Mandi Bhav Daily Mandi Bhav

किसानों के लिए ताजा खबरे व मंडी भाव | Daily Mandi Bhav |

Daily Mandi Bhav Daily Mandi Bhav

किसानों के लिए ताजा खबरे व मंडी भाव | Daily Mandi Bhav |

  • Home
  • Cart
  • Checkout
  • My account
  • Shop
  • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
  • नियम एवं शर्तें (Terms & Conditions)
  • सब्सक्राइब करें
  • Home
  • Cart
  • Checkout
  • My account
  • Shop
  • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
  • नियम एवं शर्तें (Terms & Conditions)
  • सब्सक्राइब करें
Close

Search

  • Youtube
  • Facebook
Subscribe
खबरे

2026 का कमजोर मॉनसून: किसानों के लिए चेतावनी की घंटी

By Balkishan Dhaker
June 27, 2026 5 Min Read
0

भारत का दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून देश की कृषि और जल सुरक्षा की जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन 2026 में इसकी शुरुआत बेहद कमजोर रही है, जिससे मौसम वैज्ञानिकों, किसानों और नीति‑निर्माताओं के बीच चिंता बढ़ गई है.
मॉनसून की इस सुस्त शुरुआत ने 1987, 2009 और 2015 जैसे कठिन मॉनसून वर्षों की यादें ताज़ा कर दी हैं, जब देश को गंभीर सूखे और फसल नुकसान का सामना करना पड़ा था.

जून 2026 की बारिश का हाल

मिड‑जून तक पूरे देश में सिर्फ 19.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 53.7 मिमी बारिश होती है, यानी 64% की भारी कमी.
मॉनसून की प्रगति मध्य भारत के बड़े हिस्सों में थमी हुई है, और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खरीफ फसलों की बुआई के लिए भरोसेमंद और लगातार बारिश का इंतज़ार करें.

पुराने सूखे सालों से तुलना क्यों हो रही है?

भारत ने 2016 के बाद से ज्यादातर सामान्य या लगभग सामान्य मॉनसून देखे हैं, इसलिए 2026 की शुरुआत उतनी ही चिंताजनक मानी जा रही है जितनी 2015 के बाद से किसी भी साल नहीं रही थी.
2014 और 2015 के लगातार कमजोर मॉनसून को प्रशांत महासागर में मजबूत एल नीनो स्थितियों से जोड़ा गया था, जिसने बरसात को काफी प्रभावित किया था.

ऐतिहासिक उदाहरण

  • 1982 और 1987 में मजबूत एल नीनो ने सीज़न की शुरुआत में ही बारिश बिगाड़ दी और आगे चलकर गंभीर सूखे की स्थिति बनी.
  • 2009 में मॉनसून केरल पहुंचा, लेकिन लगभग दो हफ्ते के लिए आगे बढ़ना रुक गया, जिससे जून की बारिश में 50% से अधिक कमी हुई और यह वर्ष देश के सबसे खराब सूखा वर्षों में दर्ज हुआ.
  • 2015 में भी एल नीनो की चिंता थी, लेकिन जून के दूसरे हिस्से में बारिश सुधरी और बुआई को सहारा मिला, हालांकि सीज़न अंत में बारिश सामान्य से करीब 14% कम रही.

2026 की खास बात यह है कि मिड‑जून तक ही बारिश की कमी 60% से ऊपर जा चुकी है, जो 2009 के बाद से सबसे कमजोर शुरुआती चरणों में से एक है.
जलवायु पर्यवेक्षकों के मुताबिक सबसे चिंताजनक तुलना 2015 से ज्यादा 2009 से है, जब मॉनसून आगे बढ़ा और फिर खरीफ बुआई के बेहद अहम समय में रुक गया था.

किसानों की चिंता: समय पर पानी क्यों ज़रूरी?

किसानों के लिए सिर्फ कुल सीज़नल बारिश ही नहीं, बल्कि उसकी टाइमिंग भी बेहद महत्वपूर्ण होती है.
धान, दालें, कपास और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई का मुख्य समय जून होता है, और अगर बारिश देर से या अनियमित आती है तो:

  • फसल का बढ़ने वाला मौसम छोटा हो जाता है.
  • पैदावार कम हो सकती है.
  • किसानों को फसल पैटर्न बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जैसे कम पानी वाली फसलें चुनना.

महाराष्ट्र का उदाहरण

1 जून से 15 जून के बीच महाराष्ट्र में सिर्फ 27.4 मिमी बरसात हुई, जबकि सामान्य बारिश 103.8 मिमी रहती है.
इसी वजह से प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अभी बुआई न करें और लगातार, टिकाऊ बारिश का इंतज़ार करें.
ऐसी स्थिति ने 2014 की याद दिला दी है, जब देर से हुई बारिश के कारण खरीफ बोआई धीमी पड़ी और साल कृषि दृष्टि से हाल के समय के सबसे कमजोर वर्षों में से एक बन गया.

क्या 2026 को अभी सूखा कहा जा सकता है?

कमजोर शुरुआत के बावजूद विशेषज्ञ अभी पूरे सीज़न को सूखा मानने से बचने की सलाह दे रहे हैं.
टेरी यूनिवर्सिटी के विज़िटिंग प्रोफेसर और जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ प्रो. एस.एन. मिश्रा के अनुसार हर मॉनसून सीज़न अपनी प्रकृति में अलग होता है, क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों में और अलग‑अलग समय पर बारिश का पैटर्न काफी बदलता रहता है.

वे कहते हैं कि जून के पहले तीन सप्ताह में जो कमी दिख रही है, वह तो सीज़न के अंत तक बनी रहने की संभावना है, लेकिन अभी पूरे मॉनसून पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी.
मिश्रा के मुताबिक भारत की लगभग 65–70% मौसमी बारिश जुलाई और अगस्त में होती है, इसलिए रिकवरी की संभावना पूरी तरह खुली है.

वर्तमान में सबसे बड़ी चिंता

  • मध्य भारत और महाराष्ट्र के ऊपर मॉनसून की धीमी प्रगति खरीफ बुआई को टाल सकती है.
  • इससे फसल उत्पादकता पर असर पड़ सकता है, खासकर वर्षा‑निर्भर इलाकों में.

सकारात्मक पक्ष यह है कि अभी अधिकांश जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य से ऊपर है, जो आने वाले समय में बारिश में सुधार होने पर एक तरह की सुरक्षा कवच दे सकता है.
मिश्रा का अनुमान है कि जुलाई के पहले सप्ताह से मॉनसून गतिविधि में मजबूती देखी जा सकती है.

वैज्ञानिकों की चेतावनी: जून खराब, पर उम्मीद बाकी

पर्यावरण वैज्ञानिक हिश्मी जामिल हुसैन भी सतर्क रहकर आशावाद अपनाने की बात करते हैं.
उनके अनुसार 2026 का कमजोर मॉनसून शुरू होना निश्चित रूप से चिंता की बात है, लेकिन यह कहना कि पूरा सीज़न सूखा ही रहेगा, फिलहाल जल्दी होगी.

वे याद दिलाते हैं कि इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि जून में प्रदर्शन कमजोर रहा, लेकिन जुलाई और अगस्त में जोरदार बारिश के दौर से मॉनसून ने खुद को संभाल लिया.
फिर भी अगर बारिश की कमी जुलाई तक बनी रहती है, तो:

  • खरीफ बुआई देर से या कम क्षेत्र में हो सकती है.
  • जलाशयों में पानी की आमद सामान्य से नीचे रह सकती है.
  • सिंचाई प्रणालियों और शहरों की पानी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
2015 से 2026 क्यों अलग है?

मान लें कि अंत में कुल बारिश 2015 जैसी ही हो जाए, फिर भी विशेषज्ञों को लगता है कि असर इस बार ज़्यादा गंभीर हो सकता है.
पिछले एक दशक में भारत में पानी और बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ी है, गर्मी की लहरों के दौरान रिकॉर्ड बिजली खपत होती है और डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से फैल रही है.

पर्यावरणविद मनु सिंह के अनुसार व्यापक जलवायु परिप्रेक्ष्य में भी बड़ा बदलाव आया है.
वे कहते हैं कि मानवीय गतिविधियों से पैदा हो रही जलवायु परिवर्तन की ताकत अब मौसम को अधिक अनियमित और चरम बना रही है.

बदलती प्राकृतिक प्रणालियाँ
  • तापमान लगातार बढ़ रहे हैं.
  • समुद्री परिस्थितियाँ बदल रही हैं.
  • वनों की कटाई, वेटलैंड्स का नुकसान और अस्थिर भूमि उपयोग कृषि और जल सुरक्षा को सहारा देने वाली प्राकृतिक प्रणालियों को कमजोर कर रहे हैं.

यदि बारिश में कमी बनी रहती है, तो देश को कृषि तनाव, जलाशयों के स्तर में गिरावट और लंबे समय तक गर्मी के कारण बिजली की मांग में तेज़ उछाल का संयुक्त प्रभाव झेलना पड़ सकता है.

किसानों और नीति‑निर्माताओं के लिए सुझाव

इस परिदृश्य में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और नीति‑निर्माताओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभरते हैं, जिनका आधार लेख में दिए गए तथ्य हैं:

  • बुआई निर्णय लेते समय सिर्फ कुल बारिश नहीं, बल्कि उसकी टाइमिंग और निरंतरता को प्राथमिकता दें.
  • प्रशासनिक सलाह का पालन करें, खासकर महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहाँ जून की बारिश बेहद कम दर्ज की गई है.
  • जलाशयों में मौजूद अतिरिक्त भंडार का उपयोग समझदारी से करें, ताकि संभावित कमी के दौर में सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतों को संतुलित किया जा सके.
  • दीर्घकालिक तौर पर फसल विविधीकरण, जल‑संरक्षण, सूखा‑रोधी फसलों और बेहतर भूमि‑उपयोग नीतियों पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी अस्थिर स्थितियाँ भविष्य में और बढ़ सकती हैं.

Tags:

elnino effectmansoon in india
Author

Balkishan Dhaker

Hi, I'm a software developer with an interest in writing and agriculture. My goal is to provide farmers and readers with accurate, reliable, and easy-to-understand information about agriculture, daily market prices (Daily Mandi Bhav), weather updates, government schemes, and modern farming practices through dailybhav.in

Follow Me
Other Articles
Previous

रुद्रपुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ का आगाज: ₹369.66 करोड़ की कृषि परियोजनाओं की सौगात

Next

🌾 नीमच कृषि मंडी भाव 🌾

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • 🌾 नीमच कृषि मंडी भाव 🌾
  • 2026 का कमजोर मॉनसून: किसानों के लिए चेतावनी की घंटी
  • रुद्रपुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ का आगाज: ₹369.66 करोड़ की कृषि परियोजनाओं की सौगात
  • नीमच कृषि मंडी भाव 🌾
  • ( नीमच कृषि मंडी भाव)🌾 अनाज और तिलहन (Grains & Oilseeds)

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026

Categories

  • Uncategorized
  • इंदौर मंडी भाव
  • उज्जैन मंडी भाव
  • कोटा मंडी भाव
  • खबरे
  • जवाद मंडी भाव
  • तकनीकी खेती
  • नीमच मंडी भाव
  • पशु आहार
  • मंदसौर मंडी भाव
  • Cart
  • Checkout
  • My account
  • Shop
  • गोपनीयता नीति (Privacy Policy)
  • नियम एवं शर्तें (Terms & Conditions)
  • सब्सक्राइब करें

elnino effect Mandibhav mansoon in india Neemuch खेत बचाओ खेती खबरे रुद्रपुर

  • Uncategorized
  • इंदौर मंडी भाव
  • उज्जैन मंडी भाव
  • कोटा मंडी भाव
  • खबरे
  • जवाद मंडी भाव
  • तकनीकी खेती
  • नीमच मंडी भाव
  • पशु आहार
  • मंदसौर मंडी भाव
  • YouTube
    Copyright 2026 — Daily Mandi Bhav. All rights reserved.